वो हमारे गांव की पगडडी थी ये हमारे महानगर की सड़के है

ठहाका वो हमारा गाँव था और वे थी हमारे गाँव की सडकें सडकें भी कहाँ? पगडंडियाँ! टूटी फ़ूटी, उबर ख़ाबर पर उन पर चल कर हम न जाने कहाँ कहाँ पहुँच जाते थे दोस्तों , रिश्तेदारो , नातेदारों और न जाने किनके किनके घरों तक ये हमारा महानगर है यहाँ की सडकें बहुत सुन्दर ह... [पूरी पोस्ट]
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[09 Sep 2007 20:44 PM]

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