एक सपनो का महल हो गर्ल्स होस्टल के सीधे सामने

ठहाका खिड़कियां मेहरा साहब उस दिन विमान मे बैठे बैठे किसी फिल्मी पत्रिका मे एक अभिनेता के सपनों के घर के बारे मे पढकर चौंक गये थे. चौंकना स्वाभाविक था, क्योकि वह अपने सपनों का महल किसी सुरम्य वादी या स्वर्ग मे नही बसाना चाहता था. वह तो बस इतना चाहता था कि उ... [पूरी पोस्ट]
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लघुकथामेरी नजर से

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[16 Sep 2007 06:00 AM]

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