ये है मुंबई मेरी जान : जाने पहचाने अनजाने लोग

ठहाका सो‍चता हूं और सं‍भव है कि शीर्षक पढ कर आप भी सों‍चने लगे़‍ कि जो जाने पहचाने हैं वे अनजाने कैसे हो सकते हैं‍. और जो अनजाने है वो जाने पहचाने कैसे हो सकते हैं. कबीर की उलटवांसी जैसी लगती है न? पर मुम्बई शहर ही उलटवासियो‍ का है. सुबह सुबह उठता हूं. प्र... [पूरी पोस्ट]
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मुम्बईmumbaiमेरी नजर से

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[06 Oct 2007 05:58 AM]

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