तन किसमिस पर मन अंगूर
तकते हुए न कभी थकते है रूप बूढे रूप देख झुर्रियों पे रंग चढ जाता है, तन किसमिस पर मन अंगूर बन पल में ही सातों आसमान चढ जाता है, बूढो का न दोष कोई इसमे है रंचमात्र रूप देखके जो रूप पर मर जाता है, सच तो ये है कि रूप सामने दिखाई दे तो मरे मुर्दे का हर्ट...
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[02 Jan 2008 06:16 AM]



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