कामना!
नव वर्ष नव मुकुलित कलियों सा खिलने को तैयार। इससे पहले विधाता तू इतना कर दे -- सद्बुद्धि, सद्चित्त , सद्भावना उन्हें दे दे, जिन्हें इसकी जरूरत है। जिससे कोई भी दिन नव वर्ष का रक्त रंजित न हो मानव की मानव से ही कोई रंजिश न हो, भय न छलके आंखों में मन म...
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रेखा श्रीवास्तव
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[22 Dec 2008 04:56 AM]



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