आखिर कब तक मैं यूं हीं बहता रहूंगा तुम्हारी ओर

बेबाक जुबां शादी होने से लेकर बच्चा पैदा होने तक का एक चक्र पूरा हो जाएगा तब नहीं जानता कि उस चक्र में मैं कहां रहूंगा केंद्र में, परिधि पर या परिधि के बाहर * ** * * * * कैसे बताऊं कि रबर की तरह खींचकर छोड़ दिए जाने के सिलसिले ने कितना लहूलुहान किया है मुझे ** *... [पूरी पोस्ट]
writer बच्चन सिंह
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[04 May 2009 01:46 AM]

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