लोकतंत्र के रक्षक हैं या ?
एक बहुरूपिया धूर्त बेईमान असभ्य ,क्रूर सभ्य नागरिक की भाषा में अपने दुर्गुणों का बखान सदगुणों में प्रवर्त कर त्यागियौं जैसा बोध जनता जनार्दन पर अभिमंत्रित कर रहा है , शासन करने हेतु अपने लक्ष्य को मीन की नैन बना तन से श्याम मन से कलुषित इच्छाओं में स...
[पूरी पोस्ट]
K.P.Chauhan
7
0
0
0
0
[16 Mar 2009 15:39 PM]



Shuffle








