सत्य के पर्याय

JHAROKHA सच्चाई के आज मायने बदल गये, सच पर झूठ के ताले पड़ गये। कानून की आंख पर पट्टी बंधी, हाथ भी रिश्वत की तराजू में तौल गये । पैसों के बोझ तले गुनहगार बच गये, बेगुनाह आज देखो गुनहगार बन गये। अपराधी दण्डित हों पर बेगुनाह न सजा पाये, कानून की किताब से ये शब्द... [पूरी पोस्ट]
writer JHAROKHA
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[27 Jun 2009 12:25 PM]

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