बारिश में
बारिश में माटी की सोंधी सी खुशबू से भीज उठा तन बहक गया मन। कलियों के होठों पे नहलाई धूप सा निथर उठा तन महक उठा मन। पक्षियों के कलरव सा अठखेलती लहरों सा नाच उठा मन थिरक उठा तन। सांझ की झुरमुट में प्रियतम की आहट पर गा उठा मन हुलस उठा तन। 00000000 पूनम...
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JHAROKHA
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[17 Jul 2009 13:59 PM]



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