बालगीत

JHAROKHA आज मैं अपना एक बालगीत प्रकाशित कर रही हूं। वैसे आप लोग मेरे अन्य बालगीत फ़ुलबगिया ब्लाग पर पढ़ सकते हैं। नाना जी की मूँछ नाना जी की मूँछ जैसे गिलहरी जी की पूंछ अकड़ी रहती हरदम ऐसे जैसे कोई रस्सी गयी हो सूख। नाना जी मूँछों पर अपनी हरदम देते ताव पहलवान जी... [पूरी पोस्ट]
writer JHAROKHA

नाना जी की मूंछ

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[11 Aug 2009 05:19 AM]

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