बिन मारे बैरी मरै, या सुख कहाँ समाय
लोगों के नजरिये में है बेटियों के न होने का ‘उत्सव’
जितना सुख खेत में खड़ी ईख के बिकने से होता है, वैसा ही सुख जनमते बेटी के मरने से और अगर शादी से पहले बेटी मर गयी तो क्या कहने? यह अपनी तन से पैदा हुई ‘तनया’ के बारे में बुंदे...
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admin
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[16 Aug 2009 21:47 PM]



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