राह्-ए-मौहब्बत ~~
कठिन बहुत है प्यार की राहें तुम ना जाना इन राहों में जोगी बन के आज भी मजँनू घूम रहे हैं इन राहों में ! टूटे ख्वाबों के कुछ टुकड़े बिखरे होंगे इन राहों में हसरत होंगी पाँव के नीचे और छाले भी इन राहों में ! पार नदी के खड़ी हुई हैं कितनी सोहणी इन राहों मे...
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निर्झर'नीर
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[14 Jan 2009 01:13 AM]



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