कोई तो वज़ा है .

NirjharNeer हर अंज़ाम से वाकिफ़ हूँ मुझे सब जुर्म पता है ! जलता रहूँ इस आग में यही अब मेरी सज़ा है !! चाहूँ तो एक पल में ये दूनिया में छोड़ दूँ ! जीता हूँ मगर आज भी ये तेरी रज़ा है !! माना की मोहब्बत में मज़ा है जीने मरने का ! तुमसा हो जो दिलकश तो अदावत में भी मज़ा ह... [पूरी पोस्ट]
writer निर्झर'नीर
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[14 Jan 2009 01:12 AM]

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