बेबस जवानी....

NirjharNeer बचपन याद नही बस याद है मुझे जिम्मेदारियों के बोझ से लड़कपन के लड़खड़ाते कदम इससे पहले की जवानी मेरे दर पे दस्तक देती में ताला लगा के चल दिया तलाश में रोटी की एक बार जब में गाँव गया था तब पता चला , वो आयी थी दर पे ताला देख उदास मन से मुझे ढूँढने शहर चली... [पूरी पोस्ट]
writer निर्झर'नीर
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[19 May 2009 03:41 AM]

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