जा रहे हो कौन पथ पर ?

NirjharNeer पथ को तुम देखो जरा मन की आँखें खोलकर सत्यपथ को छोड़कर तुम जा रहे हो कौन पथ पर ! ना प्यार के साए है इस पथ ना कोई हमराह है काफिलों को छोड़कर तुम जा रहे हो कौन पथ पर ! ना कोई मंजिल है इस पथ ना लौटने के है निशाँ इंसानियत को छोड़कर तुम जा रहे हो कौन पथ पर... [पूरी पोस्ट]
writer निर्झर'नीर
views
6
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[19 Mar 2009 06:41 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix