सफ़ेद धुआं
इक अलसाई सर्दी की सुबह जमुना में कोई हलचल ही नही खिसकता था नभ में,पुल के ऊपर सूर्य में कोई चमक ही नही ज़मीं से कुछ ही ऊपर टंगा था घना सफ़ेद धुआं छिप गया था शहर का चेहरा घिनौना था जो इसके बिना मृत, नदी के किनारे पड़ा लावारिस एक बच्चे का शेष धुंध का शुक्...
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Kali Hawa
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[15 Oct 2008 09:23 AM]



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