अब नहीं बाबूजी

बचपन की कहानियां अब नहीं बाबूजी शहर के मुख्य चैराहे पर स्थित उस हनुमान मंदिर से मेरी बहुत सी भूली बिसरी बातें जुड़ी हुई हैं। मैं बचपन में पिताजी के साथ अक्सर हर मंगलवार को मंदिर जाया करता था। मेरे मन में सदा यही लालच रहता था कि मंदिर जाने पर ढेर सारा प्रसाद खाने को म... [पूरी पोस्ट]
writer Hem Chandra Joshi
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[25 Dec 2008 07:09 AM]

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