पोंडिचेरी के भवानी सिंह चारण की नज़्म

Hamzabaan हमज़बान जिस भाव-भंगिमा और तेवर के साथ यह युवा कवि-शायर शायरी कर रहा है.इस उम्र की दीवानगी उसे ज़रूर मंज़िल- मुक़ाम तक ले जायेगी.कुछ उस्ताद बहार-मात्रा की मीनमेख निकाल सकते हैं.लेकिन शुरूआती वक्त है, सो इसे नज़र अंदाज़ किया जाना चाहिए। आज़ादी के उत्सव के वक्त इस... [पूरी पोस्ट]
writer शहरोज़

नया चेहरा

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[14 Aug 2008 15:01 PM]

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