हिंदीभाषी इलाके की बपौती नहीं है राष्ट्रवाद
उमेश चतुर्वेदी राज ठाकरे के विषवमन ने इन दिनों राष्ट्रीयता और राष्ट्रवाद को लेकर नई तरह की बहस छेड़ दी है। राष्ट्रवाद वैसे ही इन दिनों संकुचित अर्थ ग्रहण कर चुका है। राष्ट्रवाद का जिक्र आते ही लोगों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की...
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उमेश चतुर्वेदी
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[05 Nov 2008 23:53 PM]



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