नाकाम कोशीश

आशुतॊष मासूम... तुझे भुलने कि फिर से एक नाकाम कोशीश कि है, जिन्दगी के साथ एक और जंग कि आगाज कि है. तुझे भुलने कि खातीर जब जब जिन्दगी को आवाज दी है, जिन्दगी ने तब तब तुम्हारी और बस तुम्हारी ही बात कि है. तुम्हे और नही याद करना है, जब जब खुद से बात ये कि है, दिल और जु... [पूरी पोस्ट]
writer आशुतॊष
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[20 Jul 2007 07:06 AM]

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