एहसास

आशुतॊष मासूम... तेरा एक एक एहसास मुझको रुला जाता है, भुलने वाले क्या कभी तुझको मेरा चेहरा याद आता है. तेरी चाहत के एक एक मोती को आज भी कोइ संजोता है, भुलने वाले क्या तु भी कभी उस की याद मै आखे भिगोता है. आज भी तेरी याद मे कोइ शख्स रोने से डर जाता है, उसके हर अक्स मे... [पूरी पोस्ट]
writer आशुतॊष
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[20 Jul 2007 07:03 AM]

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