मेरी यादे

आशुतॊष मासूम... आज मेरा घर मुझको बुलाता है, वो मेरा आग़ॅन मुझको याद आता है। वो गलीयाँ जीस पर मै दौडा कराता था, वो मन्दिर की घॅटी जिसे मै रोज बजाया कराता था, सुबह का निकला शाम को घर आया करता था, घर पर आ हर रोज,एक नई कहानी सुनाया करता था, आज मेरा वो घर मुझको बुलाता है,... [पूरी पोस्ट]
writer आशुतॊष
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[20 Jul 2007 06:28 AM]

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