दर्द एक अनुभूति
दर्द की एक अनुभूति, मुझसे परेशान है. वह सूनी सी, पथराई सी, आँखो से निकलना चाहे, मै चाँहू मेरे रक्त कणो के संग संग बह्ती जाये.वह चाहे अपनी व्यथा सुनाकर गुजित करना दिवारो को,मै चाँहू पहले तोडे वह मेरे जीवन मन्दिर द्वारो को. दर्द की वह् अनुभूति, जो मुझम...
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आशुतॊष
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[20 Jul 2007 07:09 AM]



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