अधुरा ख्वाब - एक अधुरी कहानी

आशुतॊष मासूम... आरामदेह कूर्सी पर बैठा मानव अजीब सी उधेडबुन मे गुम था. सिर्फ २७ साल की उम्र मे ही उसने वो सब पा लिया था, जो लोगों को पाने मे एक उम्र लगानी पडती है। आज उसके पास अपना मकान, अपनी गाडी, बैंक बैलेंस, सब कुछ था, फिर भी उसे कुछ कमी सी लग रह थी। वो अपने उन द... [पूरी पोस्ट]
writer आशुतॊष
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[11 Dec 2007 15:34 PM]

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