खुद के तलाश-अमृता प्रीतम के साथ

आशुतॊष मासूम... आज दो दिन हो गये रुम से निकले हुये, सिर्फ पेट की भुख मिटाने के लिये रुम से निकलता हुं और वापस फिर से खुद को कमरे मे बन्द कर ले रहा हुं. आखिर क्यों ना रहुं कमरे मे, इतना प्यारा दोस्त जो मिल गया है. पुरे कॉलेज मे शायर के नाम से मशहुर हुं, लोगों को कहते... [पूरी पोस्ट]
writer आशुतॊष
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[13 Dec 2007 20:26 PM]

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