पिंजर

आशुतॊष मासूम... १९३५ की भुमी पर रची गई कहानी उस पूरो की है, जिसे रशीद अपनी पुरखों की लडाई का बदला लेने के लिये,शादी के ठीक १५ दिन पहले उठा लेता है. अब पूरो उस पिंजर मे बंद होकर रह जाती है, जहॉ से निकलने के बाद उसकी कोई दुनिया ही नही है. उसके मॉ पिताजी अब अपनी उस बेट... [पूरी पोस्ट]
writer आशुतॊष
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[14 Dec 2007 16:07 PM]

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