बेटी

आशुतॊष मासूम... बेटी के जीवन मे वो बेला भी आई थी, मां, बाप, भाई, सबको देनी अब विदाई थी, घर का वो आंगन, जिसको वो अपना बताती थी, आज एक अंजान के खातीर वो सबसे हुई पराई थी, मायके की इज्ज्त आज अपने काधों मे देख, आज बेटी के आखो मे आंसु की धार बह आई, अम्मा, बाउजी ने जो सिख... [पूरी पोस्ट]
writer आशुतॊष
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[28 Dec 2007 04:18 AM]

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