खुशी की तलाश......

आशुतॊष मासूम... तुमने जो चित्र कभी अपने ख्वाबों मे बनाये थे, आज मैने उस चित्र मै रंग भर दिया है, फिर भी वह चित्र अधुरा दिख रहा है, क्योंकी अब चित्र मे तुम्हारे होने का एह्सास नही है. तुमने जो कभी मंजिल बनाई थी अपने लिये, आज मै उस मंजिल पर खडा हुँ, पर मुझे आज वो मंजि... [पूरी पोस्ट]
writer आशुतॊष
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[08 Jan 2008 19:48 PM]

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