म्हारो हस्ताक्षर गीत...दादी थारी चरखो चाले
चरर मरर ,चरर मरर,चरखो चाले.... दादी थारो चरखो चाले...... अणी गीत से आखा देस मे म्हने पेचाण मिली.घर-आंगण का मीठा रिस्ता को गीत हे यो.अपणा घर-घर में इ रिस्ता त्याग,संघर्ष ओर प्रेम की पावन डोर वे हे.ईंमे भी घट्टी की चरर - मरर हे और हे परिवार की मंगल काम...
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मालवी जाजम
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[10 Jun 2007 06:12 AM]



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