चार लाईन में रिस्ता की बात
मालवी जाजम पे आज मालवी में लिखी कविता पेश हे.रिश्ता की गंध अपणी बोली ज्यादा मीठी वई जाए हे. म्हारो यो भी प्रयास हे कि इण चिट्ठा पे गीत,कविता,गजल,हाईकू,दोहा,मुक्तक सबका सब नमूदार वे.म्हारो यो भी केणो हे कि बोली को मानकीकरण मुश्किल काम हे. बोली को आँचल...
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मालवी जाजम
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[22 Jun 2007 10:11 AM]



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