याँ सेर में सब देखा देखी का चोचला हे

मालवी जाजम......बोलोगा तो बचेगी मालवी चतरलाल की चिट्ठी भई कचरा जी, राम राम।अठे सब मजा में है। अपरंच समाचार यो है कि मालवा में पाणी खूब बरस्यो ओर दादा आनंदरावजी दुबे की कविता याद अई गई... बस बसंत्या बरसात अई गई रे। जीवी ने जस जाण जे जसंत्या, जिंदगी जई री थीपण अब हाथ अई गई रे, बस बसंत्या ब... [पूरी पोस्ट]
writer मालवी जाजम
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[17 Jul 2007 11:07 AM]

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