संजय पटेल की मालवी कविता
जमानो नीं बदलेगा लुगई रोज रिसावे लाड़ी पाणी नीं बचावे तेंदूलकर रन नीं बनावे छोरो घरे नीं आवे छोरी सासरे नीं जावे माड़साब सबक नीं करावे टाबरा भणवा नीं जावे नेता झूठी कसम खावे अखबार सॉंच छुपावे हेडसाब थाणा में खावे भई-भई रोज कुटावे बेसुरो नाम कमावे मालवी...
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मालवी जाजम
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[11 Dec 2008 15:06 PM]



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