तपते मौसम में हिन्दी तर्जुमे के साथ मालवी की ग़ज़ल !
बोली की अपनी ख़ूबसूरती है. हालाकि भाषा पंडित बोली से थोड़े नाराज़ ही रहते हैं . अपने अपने अंचल में बोली का अपना विन्यास,मुहावरे,लहजा और कहन है.मालवी भी इससे अछूती नहीं है. आलम ये है कि इन्दौर, उज्जैन,रतलाम,धार या मंदसौर (तक़रीबन २०० कि.मी के रेडियस में)म...
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मालवी जाजम
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[30 Apr 2008 10:53 AM]



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