हे भारत मां!... मैं धन्य-धन्य.....
ये धरती कितनी सुंदर.. इतना स्नेह इसके भीतर.. जैसे मां का आंचल... हे भारत मां! ... मैं धन्य-धन्य तेरी बनकर.. तेरी हवा बहती मेरी सांसों में.. तेरे ही धान्य से हुआ पालन.. ये मेरी देह.. सब तेरा ही... बहता है जो नसों में लहू बनकर.. हे भारत मां!... मैं धन्...
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[13 Aug 2007 04:38 AM]



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