रात भर सोई नहीं मैं....
रात भर सोई नही मैं... सोचती तुमको रही... चांदनी खिड़की पे खड़ी थी... मैं खिड़की पे बैठी रही... चांद से बातें हुई... रोशन सितारों को तका... नींद पास में थी... पलकें मगर झपकी नहीं... मुझसे नाराज हैं.... चादर, बिस्तर, तकिये मेरे... उनको सोना है...मगर.. मैं...
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[08 Sep 2007 10:40 AM]



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