मेघा तुम अभी मत बरसना....
अभी गीला है मेरे घर का आंगन... अभी नम है वो लीपी हुई मिट्टी... बह जायेगी... मेघा तुम अभी मत बरसना..... रात जो छत पर डाली थी... वो खटिया..वो चटाई.. अभी तक वहीं पड़ी है... भींग जायेगी.... मेघा तुम अभी मत बरसना.... आंगन में सूखते वो कपड़े... अभी सूखे नहीं...
[पूरी पोस्ट]
8
0
0
0
0
[30 Sep 2007 02:25 AM]



Shuffle








