बस यूं ही..........
ख्वाब आंखों में लिये... रतजगे करता है कोई... पूछती हूं... बंजर हुई नींदों की वजह... कहता है.. बस यूं ही......... कभी बे-साख्ता शेर.. कहे जाता है.. कभी ग़जलें लिखता है... पूछती हूं.. हवाओं पे सज़दे की वजह.. तो.. बस यूं ही... मेरा दीदार किया करता है......
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[07 Oct 2007 06:17 AM]



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