तुम से ...
रात अमावस की है.... मगर याद की वादी में.... तेरे प्यार का चांद खिला है.... उसी चांदनी से ... भीगा मेरा मन.... रूप सुनहरा मेरा खिला है... तेरे ही प्रेम का सोलह- श्रृंगार है... तुझे छूकर ही... ’मन’ बहका-बावरा हुआ है.... नैना -चंचल.. ठहरे हैं तेरी राह प...
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[04 Oct 2008 14:38 PM]



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