मैं भी अब जीना जानती हूं.....
एक लड़्की ..हूं मैं... बंधनों से बंधी हूं... जन्म से ही... बेटी..बहन.... ये सुन-सुन बड़ी हुई.. राखी के बंधन बांधे मैंने..... पर जाने कितने बंधनों में मै जकड़ी गई.... ईज्ज्त... आबरू.... हया..शर्म..... जाने कितने परदों से मुझे ढका गया...... बाली.... झुमके...
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[01 Dec 2008 10:26 AM]



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