मेरी जान भी बस वहीं से रूखसत होती है.....
यूं किसी चीज़ से डर लगता नहीं मुझको.. बस एक तेरी नज़रों से दहशत होती है... किसी और की ख्वाहिश अब नहीं मुझको.. पर जाने क्यों तुझसे मोहब्बत होती है... सारे जिस्म को मेरे अब कोई एह्सास होता नहीं... लेकिन तेरे नाम से दिल में अब भी हरकत होती है... मैंने तो...
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[19 Dec 2008 02:13 AM]



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