सिद्धेश्वर दा के हुक्म पर गोपालबाबू

प्रत्येक वाणी में महाकाव्य... आज गोपालबाबू फिर गा रहे हैं ज़रा छोटे ही अंतराल पर। इसके पीछे सिद्धेश्वर भाई का हाथ है। इस गीत का थीम भी विरह ही है और इसमें स्त्री घुघूती से गुहार कर रही है आम की डाल पर बैठकर न गाने के लिये क्योंकि उसकी घुर-घुर सुनकर स्त्री को अपने पति की बेतरह याद... [पूरी पोस्ट]
writer महेन
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[12 Sep 2008 10:43 AM]

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