एक आवाज़ स्टूडियो से बाहर और स्टूडियो के अंदर
एक आवाज़ जो इस देश के हज़ारों-हज़ार लोगों का स्वर बनी, एक स्वर जो अवसाद में, उल्लास में, यों कहें कि रोज़मर्रा के हर मूड में बतौर आदर्श लोगों के मानस में छाया रहा। अपने भीरु व्यक्तित्व की सतहों के नीचे छिपे नायक को कल्पना में जब भी लोगों ने सुरों में नहल...
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[16 Sep 2008 13:47 PM]



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