महफ़िल सजी है सुख़नगोई की मलिका पुख़राज के संग

प्रत्येक वाणी में महाकाव्य... यूँ समझ लीजिये कि महफ़िल उरूज पर है और एक ओर सुख़नगो बैठे हैं, दूसरी ओर सुख़नफ़हम। इस ओर बैठी हैं मलिका पुख़राज। बात छिड़ी है ग़ालिब की। मलिका ने सुर साधे ही हैं और कह रही हैं ग़ालिब की ये ग़ज़ल: जहां तेरा नक़्शे-क़दम देखते हैं ख़ियाबां-ख़ियाबां इरम देखते हैं दिल-... [पूरी पोस्ट]
writer महेन
views
5
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[18 Sep 2008 13:05 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix