हीरे नी रांझा जोगी हो गया

प्रत्येक वाणी में महाकाव्य... ऐसा बिरले ही होता है कि हम यहां पर एक ही कलाकार को छोटे अंतराल पर दोबार लाएं, मगर कैलाश खेर के लिये मैनें अपवाद रख छोड़ा है। वह इसलिये क्योंकि एक कलाकार को या एक तरह के संगीत को भी मैं लगातार ज़्यादा दिनों तक नहीं सुनता, मगर यहां भी अपवाद बन गया है। पि... [पूरी पोस्ट]
writer महेन
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[05 Jan 2009 12:53 PM]

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