ऐ ‘दाग़’ तुम तो बैठ गए एक आह में

प्रत्येक वाणी में महाकाव्य... कुछ फ़नकार ऐसे होते हैं जिनकी शरण हम बार-बार जाते हैं। ऐसे कलाकारों की मेरी फ़ेहरिस्त थोड़ी लंबी है। रफ़ी और तलत साहब इसी श्रेणी में आते हैं। जब ग़ज़लों की बात आती है तो उस्ताद मेहदी हसन साहब और फ़रीदा आपा भी ऐसे फ़नकार हैं जिनकी ओर जाने का बार-बार मन करता ह... [पूरी पोस्ट]
writer महेन
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[09 Jan 2009 13:37 PM]

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