क्षणिकाएं

Betuki - Vyang Baan कशमकश मैं हूं कि नहीं जीवन इसी कशमकश में बीत जाएगा सोचता हूं कुछ करूं अपने अस्तित्व का आभास खुद करूं दूसरों को करा दूं सहारा बन सकूं किसी बेसहारा का उतार फेंकूं ये लिबास पाखंडों के पर क्या मैं यह कर सकूंगा शायद हां या नहीं जीवन इसी कशमकश में बीत जाएग... [पूरी पोस्ट]
writer betuki@bloger.com
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[11 Sep 2008 14:07 PM]

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