अप्रेरक प्रसंगः कपड़ों से फर्क पड़ता है

Betuki - Vyang Baan कुछ समय पहले ही बात है। दास जी अपने सरकारी बंगले के अंतःपुर में विश्राम कर रहे थे। आस-पास चमचों की चटर-पटर रोजाना की भांति ही माहौल को चमचामय बनाने में सफल हो रही थी। प्राचीन समय के इद्रलोक की भांति ही अप्सराएं भी वहां मौजूद थीं। सोमरस का पान करते हु... [पूरी पोस्ट]
writer betuki@bloger.com
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[12 Sep 2008 05:51 AM]

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