मृग मारीचिका
दुनियां के इस रेगिस्तान में ये मेरे निसां आंधी के इक झोंके में मिट जाएंगे। फिर रह जायेगी इक सूनी जमीं और चतुर्दिशा में बढ़ता अंजान लोगों का काफिला जो छूना चाहता है वह मृग मारीचिका जिसकी तलाश में मैंने उम्र तमाम की। और न जाने कितने लोग दफन हैं इस रेगि...
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betuki@bloger.com
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[09 Oct 2008 03:52 AM]



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