बेतुकीः फिर निपट लिये रावण जी
फिर निपट लिये रावण जी। आपके सालाना निपटान दिवस पर आपके पुतले खूब धू-धू कर जले। अरे आपको साक्षात निपटाने की तो किसी में हिम्मत है नहीं। आपके पुतले को जलते हुए देखकर ही अपन तो पुरुषार्थ दिखा देते हैं। भाई दसानन किसी जमाने में आपके दस सिर हुआ करते थे। आ...
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[09 Oct 2008 14:35 PM]



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