अप्रेरक प्रसंगः दोस्त वही जो प्रभावशाली
एक समय की बात है, दास जी अपने सरकारी बंगले के गार्डन में ध्यानस्थ बैठे थे। चारों ओर शांत मुद्रा में चमचे उनके इस रूप को देखकर गार्डन-गार्डन हो रहे थे। चारों ओर चमचों की बढ़ती भीड़ देख दास जी ने आंख खोल दीं। प्रसन्न मुद्रा में बोले, चमचों आज क्या समाच...
[पूरी पोस्ट]
betuki@bloger.com
2
0
0
0
0
[21 Oct 2008 04:49 AM]



Shuffle








